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आखिर इमरान खान को गधा बेचने तक की नौबत क्यों आ गई ?

इमरान खान का दुर्भाग्य है कि उनका पाला भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पड़ गया।

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Positive India:Dr.Chandrakant Wagh:
आज पाकिस्तान पर कुछ बातें की जाए । पाकिस्तान मे कुछ नही हो रहा है, बस वहाँ सिर्फ इतिहास ही दोहराया जा रहा है । पाक राजनीति का सच भी सामने आ रहा है । पहले जनरल कमर बाजवा ने तथाकथित लोकतंत्र के जरिए तहरीके इंसाफ पार्टी को सत्ता पर काबिज कर दिया । इस पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष इमरान खान नियाजी का जनाधार पहले से ही था ।  क्योकि यही इमरान खान थे जिन्होने पाक को क्रिकेट का विश्व कप जिताया था। उन्होने अपनी मां की कैंसर से मृत्यु पर उनकी स्मृति मे शौकत खानम  चैरिटेबल कैंसर हास्पिटल का भी निर्माण कराया ।  इन सब कामों के कारण इमरान खान की पकड़ पाक अवाम मे अच्छी थी । पाक मे मशहूर है कि सत्ता की असली चाबी सेना के हाथ मे रहती है । फिर इमरान खान भी धीरे धीरे राजनीति के मंजे हुए खिलाडी बन गए ।  उन्होने भी अपने सत्ता मे आने के लिए देश से बड़े बड़े वायदे कर दिए।  उनका पहला वादा था कि देश से गुरबद हटाएगे । देश चलाने के लिए कोई ऋण नही लेंगे । ये ऐसे वादे है जो कभी हमारे देश मे भी लगे थे कि “गरीबी हटाओ” ।  खैर इमरान खान आखिरकार पाकिस्तान की सत्ता पर काबिज हो गए। पर सच का सामना करना पड़ा । जिस ऋण से तौबा करने की बात कर रहे थे, पर उन्ही की सरकार को सबसे ज्यादा ऋण लेना पड़ा। आखिर गधा बेचने तक की नौबत आ गई। महंगाई उनके लिए जानलेवा साबित हो गई।  इतनी महंगाई हो गई कि लोग इमरान से नाराज हो गए। इसी बीच अपने सेवानिवृत्ति को कमर बाजवा भी ने भारत का खौफ दिखाकर अपनी सेवानिवृत्त को बढा लिया । कुल मिलाकर इमरान खान ने अपना कर्ज अदा कर दिया ।

इस बीच उनका दुर्भाग्य यह रहा कि भारत मे सत्ता उनके अनुकूल नही रही । मोदी जी जैसे प्रधानमंत्री से उनका पाला पड़ा जो हर पाक के लिए मुश्किल काम था । जिस काश्मीर के मुद्दे को लेकर पाक हुकमरान अपना राजनीतिक भविष्य देखते थे । मोदी जी ने तीन सौ सत्तर धारा और पैंतीस ए खत्म कर पाक के लिए यह मुद्दा ही खत्म कर दिया । अब उन्हे पीओके बचाने की चिंता सवार होने लगी । पाक ने अफगानिस्तान के मुद्दे पर तालिबान की सरकार के लिए जो विदेश नीति बनाई उसने पाक को अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अलग थलग कर दिया। अब अफगानिस्तान उनके लिए सिरदर्द साबित होने लगा । अमेरिका को छोड़कर वह सीपैक के कारण चीन के गोदी मे जा बैठा, पर दुर्भाग्य से वो प्रोजेक्ट भी बंद हो गया। अब उस पर आर्थिक स्तर पर संकट के बादल मंडराने लगे है । हालात यह है कि अमेरिका भी घास नही डाल रहा है, वहीं आईएमएफ का भी ग्रे से ब्लैक लिस्ट मे डालने का अभियान हर साल करीब करीब चल रहा है

विदेश नीति के कारण पाक रूपया डालर के मुकाबले बहुत कमजोर हो गया है । पाक के पासपोर्ट का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई महत्व नही है । पाकिस्तान का आतंकवादियो की पनाहगाह बनने से कही भी घटना हो जाए पाक का नाम आना मामूली सी बात हो गई है । देश को बद से बदतर हालात में पहुंचाने की जिम्मेदारी सेना ने इमरान खान के माथे डाल दिया । बाजवा ने भी इमरान के विश्वनीय लेफ्टिनेंट जनरल फैज को आईएसआई से हटाकर शायद नदीम को उसकी जगह दे दी, जो इमरान खान को नागवार गुजरी । यह बात मीडिया मे लीक होने से लोगो को भी पता चल गई।  अब हालात यह है कि सेना और इमरान खान आमने सामने हो गए। अगर इस निर्णय को मानते है तो खान साहब की इज्जत का फालूदा बनना तय है । यही कारण है कि खान साहब कितने दिन सत्ता मे रह पाऐंगे यह कहना मुश्किल है । एक पाकिस्तानी चैनल की चर्चा मे वहाँ के विशेषज्ञ की राय देखा तो मैं भी अचंभित हो गया कि इमरान खान का हाल कही स्व. जुल्फिकार अली भुट्टो जैसा न हो जाए। या तो फांसी या आजन्म कारावास या फिर दूसरे शासको जैसे कही निर्वासित न होना पड़े । कुल मिलाकर सत्तर साल से पाकिस्तान की राजनीतिक हश्र यही रहा है । कहां नियाजी पाक ए मदीना बनाने की सोच रहे थे पर राजनीतिक हकीकत ने उन्हे अपने जीवन के सबसे मुश्किलात समय मे लाकर खड़ा कर दिया है । बची  खुची परेशानी कोरोना ने पूरी कर दी । जो भारत विश्व को कोविड वैकसीन मुहैय्या करा रहा था । उसने भी औपचारिकता कर हाथ खींच लिया, जो स्वाभाविक भी है । वैसे भी नियाजी सरनेम से पाक के आम नागरिक को आपत्ति है कि पूर्व में एक लेफ्टिनेंट जनरल नियाजी ने नब्बे हजार सैनिको के साथ भारत मे आत्मसमर्पण कर पाक को लज्जित कर दिया । यह दूसरा नियाजी है जिसने पाक को तबाह कर दिया ।  कुल मिलाकर इमरान खान कितने दिन प्रधानमंत्री रहते है यह आने वाला दिन बताएगा ।  पर उनका यह फेमस डायलाग ” कुछ भी हो जाए हमे घबराना नही है  ”
बस इतना ही ।
लेखक:डा.चंद्रकांत रामचन्द्र वाघ-अभनपूर(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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