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विकास और आदिवासी विनाश(1)कनक तिवारी की कलम से

विकास और आदिवासी विनाश- प्रथम किस्त

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Positive India:Kanak Tiwari:
धरती आदिवासी की स्थानिकता, पहचान और विशेषता की सूचक है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ड.) और (छ) में लिखा है कि अपने जीवनयापन के लिए प्रत्येक नागरिक को भारत के किसी भी भू भाग में बस जाने का अधिकार होगा। अपने बसे हुए भूभाग से नहीं हटने को आदिवासी अपनी सांस्कृतिक संवैधानिकता समझता रहा है। आदिवासी जीवन में पारम्परिक ज्ञान स्त्रोत, हस्तकलाएं, सांस्कृतिक अभिव्यक्तियां वगैरह उसकी रहायशी धरती की सोंधी गमकें हैं। धरती से आशय उन सभी प्राकृतिक संसाधनों से युक्त माहौल से है जो देखने में स्थिर लेकिन समय के आयाम में बहता रहता है। धरती वह चमत्कार है जिसके भूगोल का अर्थ इतिहास भी है। धरती (वह हिस्सा जो आदिवासी समूह के लिए पूरी दुनिया है) आदिवासी जीवन का अर्थशास्त्र भी है। यह आदिवासी है, महानगरों के लोग नहीं, जिसका धरती से रहस्यात्मक अनुभूति का गहरा आध्यात्मिक रिश्ता भी है। वह एक साथ अपनी पूर्वज पीढ़ियों के संस्कार सुरक्षित रखने, सामूहिकता में जीने और वंशज पीढ़ियों को परम्पराओं का यश देते जाने के जीवन प्रयोगों को अपने होने का अर्थ समझता है। पहाड़, नदियां, पशु पक्षी, वनसंगीत, पेड़ पौधे आदि उसे सभ्यता के आक्रमणों से बचाए रखने का कवच नहीं हैं। ये सब मिलकर उसके जीवन का अहसास पैदा करते हैं। ऐसा जीवन दैहिक सीमाओं के परे जाकर दूसरों का भला करता हुआ उनमें जी रहा हो। ‘अपनी‘ धरती पर अधिकार बनाए रखना इसलिए आदिवासी का पीढ़ीगत सांस्कृतिक आग्रह है, आर्थिक या वैयक्तिक नहीं। वह तो भू-अधिकारों का शहरी अनुवाद है। अपनी धरती के सीमा पार का संसार आदिवासी के लिए सदैव विदेश, अन्य लोक, अबूझ या अरुचि का क्षेत्र रहा है। आदिवासियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी भूमियों के स्वामित्व और आधिपत्य को बचाए रखने, उसकी वैधानिक मान्यता चाहने, उसके पारम्परिक दोहन और फिर उसके माध्यम से अपनी संस्कृति, परम्पराओं, ज्ञानशास्त्र, दृष्टिकोण और समूचे अस्तित्व को सुरक्षित रखने से है। आज सब का साथ सब का विकास का शोर है। आदिवासी उसका अपने आचरण में अनजाने ही समर्थक रहा है। वही उनके जीवन का मूलमंत्र और अस्तित्व का अर्थ है। वही जीवन शैली उन्हें सभ्यता के हाथों संस्कृति सम्पन्नता का प्रमाण पत्र भी दिलाती रही है।(क्रमश:)

साभार:लेखक:कनक तिवारी (ये लेखक के अपने विचार हैं)

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