नेस्तनाबूद नहीं होगा जब तक बॉलीवुड, नवोदय कहां से होगा?
स्टारडम में बादशाहत, दबंगई और परफेक्शनिस्ट जैसा तमगा बंटने के बावजूद भी लोग बॉलीवुड वालों पर थूकते हैं। अरुण गोविल की तरह पूजे नहीं जाते, कम से कम सम्मान तो बचा रहता।
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