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निंदा में ख़ुशी का अश्लील भाव , मनुष्य विरोधी है

- दयानंद पांडेय की कलम से -

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Positive India: Dayanand Pandey:
प्रयाग , महा कुंभ में हुई भगदड़ में लोग मरे । नई दिल्ली स्टेशन पर हुई भगदड़ में भी प्रयाग , महा कुंभ जाने वाले लोग मरे । निश्चित ही यह दुर्भाग्यपूर्ण है ।और कि योगी , मोदी सरकार इस के लिए पूरी तरह दोषी हैं । इस में कोई दो राय नहीं है । यह लोग महा कुंभ का विश्व व्यापी प्रचार ही करते रह गए । दुर्घटना रहित व्यवस्था करने में पूरी तरह विफल रहे । यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है और शर्मनाक भी । मोदी , योगी का बहुत बड़ा फेल्योर है यह । लोग मृत्यु की डुबकी मारते जा रहे हैं और आप सरकार में रह कर कुछ कर नहीं पा रहे हैं । सिर्फ़ सनातन की माला जपने से लोगों का गया जीवन नहीं लौट सकता । पचीस लाख के मुआवजे से परिवारीजन का दुःख और शोक समाप्त नहीं हो सकता।

लेकिन इस दुःख के बहाने कुछ राजनीतिक दल के लोग , कुछ सेक्युलर चैंपियन , कुछ मुस्लिम समाज के लोग , कुछ जहरीले लोग जिस तरह निंदा के बहाने ख़ुशी मना रहे हैं , यह तो और दुर्भाग्यपूर्ण है । जले पर नमक छिड़कने जैसा है।

जैसे इन्हीं अप्रिय घटनाओं की प्रतीक्षा थी , इन लोगों को । जैसे मनोकामना पूरी हो गई इन लोगों की।

इंदिरा गांधी की इमरजेंसी के समय भवानी प्रसाद मिश्र रोज़ एक कविता लिख कर विरोध जताते थे । त्रिकाल संध्या संग्रह में यह कविताएं छपीं । तो उसी तरह इन दिनों अपने को कुछ वामपंथी कहने वाले लेखक , पत्रकार रोज़ ही महा कुंभ को ले कर सोशल मीडिया पर अपना मल-मूत्र ले कर उपस्थित रहते हैं । दिन में दस बार , बीस बार । ऐसे जैसे होली खेल रहे हों , अपने ही मल मूत्र से । किसी बीमार की तरह अपने ही मल-मूत्र में लिपटे हुए यह लोग इतने घिनौने , इतने अवश और दरिद्र दिखते हैं कि कुछ कहते नहीं बनता।

फिर इन सेक्यूलर चैंपियन की आड़ में कुछ कट्टर लीगी पापकान की तरह उछल रहे हैं , लाशों का स्मारक बता कर आनंद की बांसुरी बजा रहे हैं , यह बहुत घृणित है । कोविड की याद में घुल रहे हैं । यह लोग भूल जा रहे हैं कि मक्का की भगदड़ में हर साल अनगिनत लोग मरते हैं । लेकिन कोई इस का मज़ाक़ उड़ा कर आनंद का भाव नहीं दिखाता ।

इस बार जुमे पर दिल्ली के एक मेट्रो स्टेशन पर जिस तरह मुस्लिम समाज के लोगों ने उधम मचा कर बिना टिकट होने का प्रदर्शन किया है , कोई पुलिस , कोई प्रशासन कुछ कर सकता था ? हां , जो यही काम जो उत्तर प्रदेश में हुआ होता तो योगी की पुलिस अब तक इन लोगों को उठा कर जेल भेज चुकी होती । सी सी कैमरे पर शकल देख कर साक्ष्य सहित । तो जैसे भीड़ की अराजकता दिल्ली मेट्रो पर कोई प्रशासन नहीं संभाल सका , उस से बुरी स्थिति नई दिल्ली स्टेशन पर हुई । भीड़ हो , भगदड़ न हो , यह कैसे हो सकता है । रेल प्रशासन का यह अपराध भरा फेल्योर है । ग़नीमत है कि अभी तक प्रयागराज की यात्रा करवा रहे जहाज सकुशल हैं ।

कब एयरपोर्ट से भी कोई अप्रिय ख़बर आ जाए , क्या पता ! आज प्रयाग एयरपोर्ट की कुछ फ़ोटो देख कर दिल दहल गया है । रेलवे स्टेशन की तरह लोग फ़र्श पर लाइन से लेटे और बैठे हुए हैं । ऐसी विकराल भीड़ किसी एयरपोर्ट पर पहली बार देखी है । तब जब कि जहाज का किराया आकाश पार कर अंतरिक्ष में निकल चुका है ।

जो भी हो , मृत्यु किसी भी की हो , कैसे भी हुई हो , शोक का सबब है । सड़क पर गाय काट कर खाना नहीं है यह । जश्न नहीं है यह । तथ्य है कि इतनी भीड़ संभालना किसी भी प्रशासन और पुलिस के लिए कठिन है । लेकिन निंदकों की निंदा में जो यह ख़ुशी का भाव है बहुत ही अश्लील और मनुष्य विरोधी है । शोक में सुख तलाशने वाले इन संवेदनहीन लोगों का इलाज हक़ीम लुकमान के पास भी नहीं है।

यह दुःख और शोक का समय है । निंदा और इस बहाने किसी जश्न का नहीं ।
साभार:दयानंद पांडेय-(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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