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मुस्लिम तुष्टिकरण की पैदाइश मुख्तार अंसारी, शहाबुद्दीन तथा अतीक का ढहता किला

भारत में धर्म विरोधी खेल रहे जबरदस्त माइंड गेम

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Positive India:Ajit Singh:
हरे टिड्डों के शरई भायजानों के त्रिगुट से बात प्रारम्भ किया जाय तो बेहतर होगा….त्रिगुट कहें या कहें त्रिकोण,जिसका एक कोंण..यानी बिहार का दुर्दांत अपराधी ही नही गजवा का एक मजबूत खम्बा शहाबुद्दीन भी तब ढ़केला गया…जब चारा चोर की सरकार गई…यूपी का दबंग अतीक तब कायदे से हैसियत मे लाया गया जब महंत जी आये….यूपी के ही मुख्तार की भी फट कर फफूंदी हुई पड़ी है क्योंकि यू.पी. मे गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी जैसी सनातन राष्ट्रवादी सरकार है…….जानते है जिन बाहुबलियों के नाम पर कभी यूपी,बिहार कांपता था वो आज भीगी बिल्ली बन कर क्यों म्याऊं म्याऊं कर रहे है..??

उसके पीछे का कारण आप हैं…आपकी वो तर्जनी है जिसने समय को पहचान कर सनातन राष्ट्रवादी सरकार को बनाने के लिये EVM का सही बटन दबाया था….!!

अब आपको करीब पच्चीस-तीस साल पीछे लेकर कर चलता हूं…जब यू.पी. मे मुस्लिम वोटों के लिये रामभक्तों की हत्या करने वाले तोतले नेता के साथ बिहार मे पशुओं का चारा तक डकार जाने वाले सड़क छाप और जातिवादी देसी नौटंकी करके राज करने वाले की सरकार थी….कहने का मतलब कि वास्तव मे उस कालखंड मे दोनो प्रदेशों मे मुस्लिम तुष्टीकरण करने के साथ जंगल राज वाली सरकार थी….उसी दोनो सरकार मे ये तीनो यानी शहाबुद्दीन,मुख्तार और अतीक का ग्राफ मनचाहे तरीके से इतना बढ़ा कि यही तीनो यूपी.और बिहार जैसे दोनो स्टेट की पहचान बन गये थे……..तीनो की तूती बोलती थी…दु:साहस इतना था कि इनमे से एक शहाबुद्दीन ने बिहार मे आई.ए.स. की हत्या करा दी तो व्हील चेहर पर बैठ कर अलतकिया वाला विक्टिम कार्ड खेलने वाले दूसरे ने महिला अंत्रवस्त्रों का कलर बताने के साथ आई.ए.स. से जूता साफ कराने तक का बयान दे दिया…तीसरा जो इलाहाबादी है,वो सबसे बढ़ कर है……खैर उस बीत चुके दोगले मुगल दौर की बात की जाये…तो उसी समय सिमी,आई.म. जैसे जेहादी संगठन बेहद सक्रिय थे…इन सबकी पृष्ठिभूमि आजमगढ़,मऊ के साथ बिहार के सिवान और इलाहाबाद के इर्द गिर्द ही घूम रही थी…आतंकी छौने और चिलगोजे वहीं से पैदा हो रहे थे….या कहें कि इन्ही तीनो की सरपरस्ती मे तैयार किये जा रहे थे…ये सब बेखौफ इसलिये थे कि राज्य से लेकर केन्द्र तक का माहौल इन जेहादियों के मनमाफिक था….इसीलिये खूब फले फूले…………इस्लामिक जेहाद का एक मजबूत ट्रायंगल शहाबुद्दीन,अतीक और मुख्तार के रूप मे तैयार हो चुका था….इसी ट्रायंगल से बहके हुये मजहबी टटपूंजिये खुद को जोड़ कर गौरवांवित होते थे….बहुत खतरनाक त्रिकोण तैयार हो चुका था….लेकिन परमात्मा भी तो सब कुछ देख रहा था….चौदह सौ सालो से इन कटपीसों से लड़ने और इनका मुंहतोड़ जवाब देने वाले भगवा ने एक बार फिर करवट बदली….मोदी के बाद योगी का आगमन हुआ……..परिणाम क्या हुआ………..आज डॉन शहाबुद्दीन जेल मे सड़ रहा है….अतीक के गुरूर को जहां योगी जी ने तहस नहस कर के रख दिया…वहीं यू.पी.आने से मुख्तार जैसे दबंग माफिया,कभी जिसके …त से चिराग जला करता था…आज उसकी फटी पड़ी है……जानते है ये सब कैसे हुआ..???

केवल,केवल और केवल आपकी जागरूकता और आपकी एकजुटता से….जिसने मोदी और योगी जैसे नायक को सत्ता सौंपी है…….बंधुओं सत्ता की ताकत समझिये….और पहचानिये…लोकतंत्र मे सत्ता ही सब कुछ होती है….साम,दाम,दण्ड़ भेद…बस सत्ता अपने पास रखिये…………!!!

इसी विषय को आगे बढ़ाते हुये देश और धर्म विरोधी लेकिन जेहादी मानसिकता के समर्थकों की मॉडस ऑपरेंडी को समझाते हुये एक और बात बताना जरूरी समझता हूं…उदारणार्थ जैसे कहा जाता है कि फलां शर्मा….हिंदूवादी ब्राह्मण था…पता लग रहा हैं की उसे मुसुरमानो ने मारा है..इसी तरह एक और हिंदू लड़के को पीट दिया मोहम्डनो ने….अक्सर समाचार खबर आती है कि किसी ठाकुर,किसी जाट लड़के की हत्या कर दी हरे टिड्ड़ों की भीड़ ने…!!

यह जाट,गूजर,ठाकुर,ब्राम्हण बताने वाला एक एक बेहद चालाक तरीका है हिंदुओं को बांटने का और इस चाल को समझना चाहिये आपको…!!

सनातन और राष्ट्रवाद की घोर विरोधी मीडिया के चम्मचचोर और भांड बन चुके पत्तलकारों के साथ सोशल मीडिया मे फेक आई.डी. लेकर बैठे जेहादियों और अर्बन नक्सलियों द्वारा हिंदुओं को विभाजित करने वाला एक नैरेटिव गढ़ा जाता है,इस बेहद सधे नैरेटिव को एक सेट एजेंडा के तहत फैलाया जाता कि मरने वाला गुज्जर,जाट,ब्राह्मण या फलां फलां होता है

और दूसरा पक्ष होता है मोमिन…लेकिन कभी म्लेच्छो की जाति नही बताई जाती…क्या उनकी कोई जाति नहीं होती…बिल्कुल होती है और हिंदुओ से ज्यादा होती है,लेकिन कभी नही बताया जाता कि वो नाई,बढ़ई,लोहार या फिर कसाई बरेलवी था या देवबन्दी…….कौन से फिरके से था…..शिया या सुन्नी या अहमदिया….??

दरअसल यह हमारे देश और धर्म विरोधियों का एक जबरदस्त माइंड गेम है……..वामी मीडिया हमारे दिमाग को कंट्रोल करता है….वो हमे तो बताता है की पंड्डी जी चुप बैठो वो मरने वाला जाट है…तुम काहे उछल रहे हो…..और चौधरी साहब कहाँ ब्राह्मणों के बीच टांग फंसा रहे हो…मरने दो इनको…एक को दूसरे का शोषक बता कर बहकाया जाता है और हम झाग की तरह बैठ भी जाते हैं…फिर एक दिन हमारा भी नंबर आता है……फिलहाल मै तो केवल जागरूक ही कर सकता हूं बाकी मै जानता हूं कि विरोधियों की साजिश का बजाय एकजुट होकर मुंहतोड़ जवाब देने की जगह……समय आने पर आप सब निर्णय लोगे तो अपनी अपनी जाति के हिसाब से ही….कभी केवल सनातनी होकर कहां सोचियेगा………..क्यों समझियेगा कि जातिगत अहं नाम की चीज को किसने न केवल हमारी सोच मे डाल दिया है वरन् हमे बांटने के लिये रह रह कर उसे भड़काता भी रहता है….हमारा बंटना ही हरे टिड्ड़ो और लाल पिछाड़ी वाले काकरोचों को मजबूत करता है….और वो एक नये तरीके से हम पर,हमारी अस्मिता पर आघात करते है….उठिये,जागिये और अपनी तर्जनी का सदुपयोग करके अपने अपमान का लोकतांत्रिक प्रतिशोध लेने मे जरा भी संकोच न करिये…..!

#वंदेमातरम्
#Ajit_Singh
साभार:अजीत सिंह-एफबी(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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