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कभी नहीं जन्मे, कभी मरे नहीं…

10 अप्रैल 1989 को रजनीश ने अपने जीवन का अंतिम सार्वजनिक व्याख्यान दिया। यह 'द ज़ेन मैनिफ़ेस्टो' पुस्तक में संकलित हुआ है। वह व्याख्यान इन शब्दों के साथ समाप्त हुआ था : "गौतम बुद्ध के अंतिम…

अगर कुंभ जितनी संख्या में अरबी, बंग्लादेसी, या रोहिंग्या इकट्ठे हों तो वे एक दूसरे को…

दुर्घटना से विचलित हो कर श्रद्धालुओं को भी उदण्ड या लापरवाह कहने वाले भी अनेकों लोग मिल जाएंगे, पर मैं उलट सोचता हूँ। मेरे हिसाब से इससे अधिक नियंत्रित भीड़ नहीं मिलेगी दुनिया में।

भारत में घुसे अवैध आप्रवासी अमेरिका की घटनाओं को बड़े ग़ौर से देख रहे हैं

ज़ंजीरों में जकड़ कर घुसपैठिये निकाले जा रहे हैं । और भारत में सीएए और एनआरसी को लाये हुए पाँच साल हो गये मगर कुछ न हुआ ।