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अमृतपाल फरार हुआ या भारतीय एजेंसियों ने उसे अपने शिकंजे में ले लिया?

-विशाल झा की कलम से-

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Positive India:Vishal Jha:
अमृतपाल क्रैकडाउन को लेकर जो भी डेवलपमेंट हुआ है, उसमें आप बस एक कांसेप्ट जोड़ लीजिए- कि अमृतपाल फरार नहीं हुआ, ठीक कार्रवाई के दिन ही गिरफ्तार हो गया। उसके बाद फिर देखिए पंजाब में क्या हो रहा है? सबसे पहले तो अमृतपाल की गिरफ्तारी होते ही पूरे पंजाब में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। निहंग सिख गणतंत्र दिवस के दिन की भांति तलवार लिए भूखे भेड़ियों की तरह सड़कों पर आ गए हैं। पत्थर चल रहे हैं। खालिस्तान जिंदाबाद के नारे गूंज रहे हैं।

विपक्षी दल कांग्रेस और अकाली इस अशांति को ढाल बनाकर खालिस्तानियों का पक्ष साधने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। बोल रहे हैं कि मोदी ने अपना सेना वापस नहीं बुलाया, तो पंजाब जल उठेगा। पंजाब अब सुलगने लगा है। दुनिया के देशों में भी प्रोटेस्ट शुरू हो गया है। कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया हर जगह इंडियन हाई कमिशन के सामने विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। सुरक्षा घेरा तोड़कर विदेशों में रह रहे हमारे राजनयिकों को थ्रेट दिया जा रहा। सभी देशों ने राजनयिकों की सुरक्षा के लिए अपने हाथ खड़े कर दिए हैं।

भारत की डिजाइनर मीडिया और लेफ्ट नैरेटर अपने-अपने नैरेशन को सजाने में काम पर लग गए हैं। छोटी-छोटी हिंसक घटनाओं को लेकर कवरेज दिया जा रहा है। देखते ही देखते एक से दो दिन में पंजाब से शुरू हुआ उपद्रव धीरे-धीरे पूरे भारत के परसेप्सन में अपना जगह बना लिया है। देश विदेश में यह पूरी अशांति भारत के लिए एक बड़ी चिंता का कारण बन गया है।

लेकिन अमृतपाल गिरफ्तार ना हो सका। उपद्रवी निहंगों की तलवारें म्यान से नहीं निकल सके। सड़कों पर थोड़ी बहुत पत्थरबाजी हुई, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था की गहनता ने, इंटरनेट पर पाबंदी ने एक तिनका भी खड़खड़ाने नहीं दिया। सिद्धू मूसे वाला के जनाजे में जहां खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे थे, पंजाब के वारिश अमृतपाल जैसे बड़े शख्सियत के लिए भी खालिस्तान जिंदाबाद के एक नारे भी सुनाई नहीं पड़े।

ब्रिटेन अमेरिका जैसे देशों में इंडियन राजनयिकों की सुरक्षा को लेकर खतरा की बात सामने आई। भारत में भी उन देशों की राजनयिकों में लगी सुरक्षा को हटा दिया गया। अब जाकर खबर आया है कि ब्रिटेन में इंडियन हाई कमिशन की सुरक्षा पहले से कहीं ज्यादा चाक-चौबंद कर दी गई है। विपक्ष से लेकर नैरेशन क्रिएटर तक को भी बोलने का एक अवसर नहीं मिल पाया। अमृतपाल के पूरे गैंग जो सैकड़ों की संख्या में थे, पूरी सुविधा से उठा लिए गए। लेकिन अमृतपाल की खोज के नाम पर खालिस्तान की अंतिम साजिश तक गहन जांच की जा रही है। फंडिंग के एक एक सोर्स को छानकर निकाला जा रहा है। और यह सब इतनी सुविधा से हो रहा कि, अमृतपाल को खोजा जा रहा है।

यह पूरा क्रैकडाउन शासन की ताकत के बलबूते पर प्रत्यक्ष किया जा सकता था। लेकिन इतनी शांति से किया जा सकता है, किसी कथित दक्षिणपंथी सरकार ने पहली बार अपने नैरेटिव की ताकत को साबित किया है। जब तक साजिश के अंतिम तिनके तक छानकर नहीं निकाल लिए जाएंगे, अमृतपाल की खोज लगातार जारी रहेगी। मीडिया में नई थिअरीज बनते रहेंगे। क्योंकि दिल्ली जाकर भगवंत मान ने अमित शाह से आधे घंटे तक बातचीत की। लेकिन अमित शाह ने केवल एक लाइन कहा था- क्या आप मुझे अमृतपाल दे सकते हो?

साभार:विशाल झा-(ये लेखक के अपने विचार है)

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