भारत में महा विस्फोटक रूप अख्तियार करता टी.बी. का रोग

World T.B.Day celebration

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सरकार का स्वस्थ्य अमला प्रति वर्ष बड़े धूम धाम से टी.बी. दिवस मनाता है और इसमें कोई बुराई नहीं है मनाना ही चाहिए . इस प्रकार के दिवस हमें आत्म विश्लेष्ण करने पर मजबूर करते है परन्तु अफ़सोस सरकार प्रति वर्ष टी.बी.दिवस मानाने के लिए सैकड़ो करोड़ रूपये खर्च कर देती है और नतीजा निकलता है सिफर बटे सन्नाटा , वही धाग के तीन पात .भारत में टी.बी. विकराल रूप धारण करती जा रही है . इसकी भयावता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विश्व के 24% से 30% टी.बी. के मरीज भारत में पाए जाते है और इस रोग के कारण हमारे देश में प्रति मिनट एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है. भारत ने एक बहुत बड़ा सपना देखा हुआ है और ये सपना है भारत को २०२५ तक टी.बी.मुक्त देश बनाने का . कैसे होगा ये सपना पूरा? टी.बी.के मरीज तो घट नहीं रहे है अपितु हर साल २८ लाख नए लोग टी.बी. का शिकार हो रहे है. परिस्थितिया ऐसी है कि कभी भी टी.बी.रुपी टाइम बम का महा विस्फोट हो सकता है . पर लगता है कि स्वस्थ्य विभाग और सरकार अभी भी नींद में है . टी. बी. मरीजो के आंकडे ये बताते है कि ३० से ३५ % मरीज टी.बी.दवाओं के प्रति रेसिस्टेंट डेवेलोप कर चुके है यानि इन मरीजो पर दवाइयों का असर ख़त्म हो गया है . ये वो मरीज है जो बहुत तेजी से टी.बी. फैलाते है . इन मरीजो को दरकार है ऍम.डी.टी.आर. दवाइयों की. चूँकि ये दवाईया भारत सरकार मुफ्त में सप्लाई करती है , इसका शार्ट होना चौकाता है. स्वस्थ्य विभाग में एक अलग से टी.बी.डिपार्टमेंट होता है जहा पूरा अमला पदस्थ है . टी.बी.के उन्मूलन हेतु डोट्स प्राणाली पहले से काम कर रही है फिर भी कम होने के बजाये २८ लाख मरीज हर साल बढ़ रहे है .अगर टी.बी.रोग के बढ़ने के कारणों में जाये तो पता चलता है कि इसके प्रमुख तीन कारक है. पहला टी.बी.रोग के टेस्टिंग की कमी. अभी भी सरकारी अस्पतालों में इसकी भारी कमी है , दूसरा टी.बी.की दवाइयों की कमी और तीसरा है टी.बी.दवाइयों के रेसिस्टेंट का डेवेल्प होना . ये कारण तो है ही परन्तु सबसे बड़ा कारण है सरकार और स्वस्थ्य अमले की उदासीनता . गरीब तबके को लोग इस रोग से अधिक ग्रसित होते है पैसो के आभाव के चलते न तो वे सही ढंग से दवा खा पाते है और न ही सही पौष्टिक आहार ले पाते है , सही दवा सही समय तक न लेने का खामियाजा है ऍम.डी.टी.आर.टी.बी. अगर सरकार अपनी नींद से जाग जाये और स्वस्थ्य विभाग को चुस्त दुरुस्त कर दे तो कोई कारण नहीं कि हम टी.बी. रुपी महामारी को हरा नहीं सकते. एक बात और गौर करने लायक है कि इस विभाग में भी भ्रस्टाचार को बोल बाला है सरकार ने पूरी तरह से अपनी आँखे मूँद रखीं है . ऐसी बेपरवाही का क्या फायदा जो भारत में टी.बी.रुपी महामारी का विस्फोट कर दे .

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