प्रशान्त भूषण प्रकरण: आखिर नेता बनते ही क्यों हो जाते है मानसिक दिवालियेपन का शिकार?

Prashant Bhushan

प्रशांत भूषण की कथित ट्वीट कि “रोमियो नहीं बल्कि कृष्ण करते थे माहिलाओ से छेड़खानी” एक दरकते मानसिक दिवालियेपन को ही दर्शाता है. प्रशांत भूषण देश के जाने माने वकील है , उनकी कानून पर अच्छी पकड़ है उसके बावजूद उनका ऐसा ट्वीट जिसमे उन्होंने न सिर्फ योगी आदित्यनाथ द्वारा गठित एंटी रोमियो स्क्वाड की आलोचना की बल्कि कृष्ण भगवन को रोमियो का दर्जा देकर , उन्हें छेड़खानी का भगवान बता कर सम्पूर्ण भारत वासियों को अपमान कर दिया .
अगर अतीत में जाये तो हमें पता चलता है कि प्रशान्त भूषण अरविन्द केजरीवाल के आप पार्टी के संस्थापको में से एक थे. परन्तु उनकी पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण ही अरविन्द केजरीवाल ने प्रशान्त भूषण को पार्टी से निकाल बाहर किया था. आप से बाहर निकाले जाने के बाद प्रशान्त भूषण ने भारत स्वाभिमान पार्टी का गठन किया . ऐसा लगता है भारत स्वाभिमान पार्टी में एक नेता की हैसियत से प्रशान्त भूषण ने ऐसा ट्वीट जान भूझ कर किया है ताकि खुद को मीडिया में बने रह सके .ऐसी बयानबाजी एक नेता के रूप में प्रशान्त भूषण के मानसिक दिवालियेपन को ही दर्शा रही है जो अफ़सोस जनक है .प्रशान्त भूषण को ये अच्छे से पता है कि कृष्ण भारत में देवता की तरह नहीं बाकि भगवान् की तरह पूजे जाते है. एक टिपिकल नेता की तरह ही उन्होंने अपने ट्वीट से पल्ला झाड लिया कि इसे गलत तरह से पेश किया गया . प्रशान्त भूषण सरीखे नेता ही गला फाड़ – फाड़ कर भारत को असहिष्णु होने का लेबल लगाने का काम करते है . तथाकथित सहिष्णु लोगो ने तो अपनी डिगरिया तक लौटा दी .
प्रशांत भूषण के इस तथाकथित बयान से तो यही लगता है कि योगी आदित्यनाथ के एंटी रोमियो स्क्वाड की सफलता ने उन्हें ये ट्वीट करने पर मजबूर कर दिया ताकि योगी जी के अच्छे कामो की चर्चा के बीच कुछ उन्हें भी अटेंशन मिल जाये ताकि कुछ लोग कम से कम ये तो जान जाये कि वे भी एक नेता है. इस तरह भारत के लोगो की आस्था को ठेस पहुचाना किसी मानसिक दिवालियेपन को ही दर्शाता है, जो शर्मनाक है तथा इसकी जितनी भी भर्सतना की जाये उतनी कम है

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