कश्मीर के पत्थरबाज बनाम देशद्रोही – कैसे मिलेगी निजात

kashmir patharbaaj
जम्मू और काश्मीर में भारतीय सुरक्षा बलों को पत्थरबाजों से निपटने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है . आतंकवादियो से मुठभेड़ के दौरान ये पत्थरबाज ढाल की तरह खड़े हो कर आतंकवादियो को निकल भागने का मौका दे रहे है.इस प्रकार पिछले पांच महीनों में घाटी के पत्थरबाजों ने पचीस आतंकवादियो को सुरक्षाबलों के चंगुल में आने से पहले भगा दिया. क्या ये पत्थरबाज देशद्रोही नहीं है ? बिलकुल है. परन्तु अफ़सोस भारत की कुछ राजनैतिक पार्टिया तथा राजनेता इस पर जम कर राजनीति कर रहे है जो सिर्फ अफसोसजनक ही नहीं बल्कि शर्मनाक भी है .कश्मीर के अलगाववादी नेता सही मायनो में देश के दुश्मन है जो बेरोजगार कश्मीरी युवायो को पत्थरबाज बना कर कश्मीर को भारत से अलग करना चाह रहे है . ये हमसभी तथा अलगाववादी नेताओ को भी मालूम है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है जिसे कोई अलग नहीं कर सकता . फिर ये नेता ऐसे क्यों कश्मीरी युवको को भड़का रहे है? इसका सिर्फ एक कारण है और वो कारण है जलते हुए कश्मीर में अपना खुद का एजेंडा चलाना और अपनी राजनैतिक रोटिया सेंकना.
कश्मीर के मीरवायज जैसे नेता असल गुनहगार व देशद्रोही है जो कश्मीरी युवको को भड़का कर पाकिस्तान के मंसूबो को साकार कर रहे है अगर भारत सरकार ऐसे अलगाववादी नेता सरीखे लोगो पर नकेल डाल दे तो कश्मीर समस्सया तुरंत हल हो जाये. इन्ही की शह पर आतंवादियों ने कश्मीर में स्कूल व कॉलेज जलाये और बंद करवाए ताकि एक पूरी की पूरी पीढ़ी को अनपढ़ रखा जाये और इस अनपढ़ पीढ़ी के जरिये पाकिस्तान समर्थित एजेंडे को लागू कर कश्मीर को भारत से अलग किया जा सके. ये वही नेता है जिनके अपने बच्चे विदेशो में रह कर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे है
कश्मीर के ये पत्थरबाज सिर्फ और सिर्फ पैसो के लिए पत्थरबाजी कर रहे है. पाकिस्तान में बैठे आतंवादियों के आका पूरे महीने की एडवांस रकम कश्मीरी युवाओं तक पंहुचा रहे है जो पांच हजार से बारह हजार तक होती है जिनका सिर्फ एक काम है धरने प्रदर्शन करना तथा सुरक्षा बलों पर पत्थर बरसाना . हमारे जवानों को दो फ्रंट पर लोहा लेना पड़ रहा है . एक अतंकवादियो को एनकाउंटर कर उनका सफाया करना तो दूसरा पत्थरबाजो से बचना तथा उन्हें बचाना. आतंकवादियो की ढाल बने पत्थर बाजो पर हमारी सेना ने सख्ती करनी शुरू कर दी है . अभी हाल ही में बडगाम में हुए एनकाउंटर में एक आतंकवादी मारा गया , साथ ही उस आतंकवादी की ढाल बने तीन पत्थर बाज भी फायरिंग में मारे गए.
हमारे सेना प्रमुख जनरल विपिन रावत ने 15 फ़रवरी को ही पत्थरबाजो को हिदायत दे दी थी कि स्थानीय लड़के यदि आतंकी गतिविधियों को अंजाम देते रहे, पाकिस्तानी झंडे दिखाते रहे तो हम उनसे देशद्रोही की तरह पेश आएंगे और कड़ी कार्यवाही करेंगे.जनरल रावत का साफ कहना था कि कश्मीरी आवाम आतंकियों को भागने में मदद कर रही है. जनरल रावत ने ये बात सिर्फ कहने के लिए नहीं कही थी. आर्मी तथा सुरक्षाबल बखूबी इस बात को अंजाम दे रहे है.
हिंसा किसी भी बात का हल नहीं हो सकता , इसे सभी नेता बखूबी समझते है परन्तु अपने निहित स्वार्थो के लिए अलगाववादी नेताओ के सुर में सुर मिलाने लगते है. ऐसे नेता भारत में में मिली हुई अभिव्यक्ति की आजादी का बेजा फायदा उठाते है . क्या नेता क्या आम जन, ये सभी को सोचना चाहिए कि क्या अभिव्यक्ति की आजादी देश हित से बड़ी है? क्या भारत सरकार को ऐसे नेताओ पर नकेल नहीं कसनी चाहिए?
कश्मीर के पत्थरबाज देशद्रोही तो है ही परन्तु इन पत्थरबाजो से भी बड़े देशद्रोही है वे अलगाव वादी नेता जो इन्हें पत्थरबाजी के लिए उकसाते है और आतंकवादियो को भगाने में मदद करते है .इन पर नकेल कसना जरुरी है
पुरषोत्तम मिश्र –चीफ एडिटर

purshottammishra1@gmail.com

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