एनएचएमएमआई नारायणा हास्पिटल में बाधाओं के बावजूद पहली बार हुआ 11 साल के बच्चे का सफल किडनी टृांसपलांट ।

Team Of NHMMI, Who Performed Successful Kidney Transplant

Team Of NHMMI, Who Performed Successful Kidney Transplant


11साल का बच्चा जब एनएचएमएमआई हास्पिटल मे आया तब उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, और शरीर में काफी सूजन आ चुकी थी। प्रारंभिक जांच मे ही पता चल गया कि उसे पुरानी किडनी की बीमारी थी। गहन जांच मे पता चला कि उसकी दोनो किडनियां खराब हो चुकी है। तथा किडनी प्रत्यारोपण ही एक मात्र विकल्प शेष बचा हुआ था।
आर्थिक तंगी किडनी प्रत्यारोपण के रास्ते में एक बड़ी बाधा के रूप में खड़ी थी क्योंकि बच्चे के पिता बस स्टैंड में एक चाय का ठेला चलाते हैं। अस्पताल के प्रयास से जब यह समस्या हल हुई तो एक दूसरी समस्या खड़ी हो गई। लंबे समय से चली आ रही किडनी की समस्या की वजह से बच्चे को हाईपरटैंसिव लैफ़्ट वैंटृकुलर फेलियर हो गया जिसमें हृदय का एक हिस्सा ठीक से रक्त प्रवाहित नही कर पाता। हृदयरोग तथा किडनी रोग विशेषज्ञों की टीम ने मिल कर बहुत मुश्किल से बच्चे को इस जानलेवा स्थिती से निकाला।
अब बारी थी किडनी टृांसपलांट की, तो बच्चे की 35 साल की माँ सामने आई। एक वयस्क की किडनी को बच्चे में टृांसपलांट करना भी जोखिम भरा था परन्तु डाक्टरों के पास कोई विकल्प भी नहीं था। इस जोखिम तथा चुनौती को एनएचएमएमआई नारायणा के डाक्टरों ने अपने हाथों में लेकर सफल बना दिया ।
फ़िलहाल बच्चा स्वस्थ है। माँ तथा पिता ने अपनी दिनचर्या फ़िर से शुरू कर दी है ।
varun sharma
डॉ वरूण शर्मा
मुझे यह बताते हुये बहुत खुशी हो रही हैं कि एनएचएमएमआई नारायणा हास्पिटल की किडनी टृांसपलांट टीम ने बड़ी ही कुशलता के साथ यह उपलब्धि हासिल की है और 11 साल के बच्चे को नया जीवन दिया है जोकि छतीसगढ में इस तरह का पहला केस है ।
vineet saini
विनीत सैनी
इस केस की जटिलता और परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए डाक्टरों ने हार ना मान कर बच्चे की जान बचाने के लिये हर मुमकिन कोशिश करने की ठानी। मैनेज़मेंट, नर्सिंग सटाफ और अन्य विभागों सहित पूरा हास्पिटल इस चुनौतीपूर्ण सर्जरी को सफल बनाने के लिए जुट गया ।

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